Tuesday, September 7, 2010

bani rahe ekta

आज पीसkameti की बेठक प्रशासन की और से बुलाई गई सभी धर्म के लोग pahuche बड़ा अच्चा लगा , खुदा करे आपसी भाई चारे का जो नज़ारा आज dekhne को मिला यह हमेशा कायम रहे ,
ओर आने वाली १५ sitambar को जब बाबरी मस्जिद के मसाले का फेसला आय सभी इसी तरह एक दुसरे के दुक सुख में साथ खड़े नज़र आय 
 

Saturday, August 21, 2010

rahemat yi rahemat

रमजान -उल -मुबारक का महिना बहुत रहेम्तों का महिना है अल्लाह ताला इस माह में अपने बन्दों पर खास करम फरमाता है,
इसी माह में मुक़द्दस पवित्र कुरान नाजिल हुई1 अल्लाह इस माह की इबादत का सवब ७२गुन बाधा कर अता करता है ,
saytano का सरदार इब्लीस को kayd कर दिया जाता है ,

Sunday, August 8, 2010

tanhai,,,,

जब भी पते है मुझे तनहा गुज़रते लम्हे
तेरी तस्वीर सी राहों में बीछा जाते है

Friday, August 6, 2010

Vafa..........

रस्मे  उल्फत जिस तरह होगी निभायेगे जरूर,
तुम हमें चाहो न चाहो हम तो चाहेगे जरूर

Thursday, August 5, 2010

hattyara ssb jawan gya jel

आज प्रशासन ने ग्रमिड़ो पर गोली चलने वाले एस एस बी जवानों में से एक जवान को जेल भेज दिया परन्तु बाकि  आरोपी एसएसबी के डिप्टी कमंदेंड व जवानों के लिए बरती जा रही नरमी से gramido में आक्रोस बढ़ता जा रहा है
आज इसी मामले को लेकर वकीलों प्रदर्शन किया

Monday, August 2, 2010

ahesas.........

ये kisni ने मेरी पलकों पर तितलियों के पर रखे है,
आज अपनी आहट भी दूर तक सुनाई दी

Sunday, August 1, 2010

जिससे जिन्दा हो, वो तमन्ना तुम ही तो हो
हम जिसमे बस रहे है वो दुनिया  तुम्ही तो हो

Saturday, July 31, 2010

thodi dur sath chalo.........

तमाम उम्र  कहा  कोई  साथ  देता  हाय  मे  जनता  हु  मगर  थोड़ी  दूर  साथ  चलो

Friday, July 30, 2010

tanhai........

एसे देखा है की जैसे उन्हें देखा ही नहीं,
आबरू चश्मे तमन्ना की बचा लाया हूँ

Thursday, July 29, 2010

ahesas...........

 रात कल अँधेरे में ज़हन के खुली छत  पर,
जाने कों आया था सीढियां महकती है,
फूल सा बदन उसका छु लिया था सपने में ,
अब तलक उसकी खुशबू से उँगलियाँ महकती हैं।

Sunday, July 25, 2010

tanhai,..............

बिछडा कुछ इस अदा से की rut ही बदल गई
एक शख्स सरे शहर को वीरान कर गया

Friday, July 23, 2010

sanghars hi jeevan hai

प्यास कहती  है  की  अब  रेत निचोड़ी  जाय,
अपने  हिस्से  में  समंदर  नहीं  आने  वाला। 

Thursday, July 22, 2010

tanhai........

शाम हो ते ही चरागों को जला देता हु
 दिल ही काफी है तेरी यद् में जलने के लिए

Wednesday, July 21, 2010

dil se.............

इसी गली में ओह  भूखा फकीर रह्ता  था
तलाश कीजे खजाना यही से निकले गा

Tuesday, July 20, 2010

bebasi

दसियों सालसे हम बेबस है हम अपनी आखो के सामने हमारे लोगो को बढ़ में तबाह हो रहे हाय, ओर हम लचर व बेबस की तरह देख रहे हये , शाशन प्रशाशन  हमारे दुखों को समझने की जगह हमे  इस समस्या से छुटकारा दिलाने के नाम पर अरबो का खेल खेल जहा हाय ,अब हमें जागना होगा अपने लिए नहीं तो अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए

Thursday, July 15, 2010

patrkar aur sanghrash

मुशकील में  पतरकारिता
अब पत्रकारों को पत्रकारिता मुशकील हो गई है . यह मुशकील जिस तरह से शाशन प्रशाशन खड़ी कर रहा हमे उस पर गहनता से विचार करना पड़ेगा . बड़ी बड़ी आतंकवादी घटनाऊ के कव्राज़ में हम हंसी हंसी मौत को गले लगते आये है.लेकिन जिस तरह से लखनऊ में पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव  किया अगर इस्पे viram नहीं लगा तो मुश्किलें और बढ सकती है jarorat है हमे सामूहिक तौर पर vichar  कर के इसका समाधान nikalne की