मुशकील में पतरकारिता
अब पत्रकारों को पत्रकारिता मुशकील हो गई है . यह मुशकील जिस तरह से शाशन प्रशाशन खड़ी कर रहा हमे उस पर गहनता से विचार करना पड़ेगा . बड़ी बड़ी आतंकवादी घटनाऊ के कव्राज़ में हम हंसी हंसी मौत को गले लगते आये है.लेकिन जिस तरह से लखनऊ में पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव किया अगर इस्पे viram नहीं लगा तो मुश्किलें और बढ सकती है jarorat है हमे सामूहिक तौर पर vichar कर के इसका समाधान nikalne की

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