Tuesday, July 20, 2010

bebasi

दसियों सालसे हम बेबस है हम अपनी आखो के सामने हमारे लोगो को बढ़ में तबाह हो रहे हाय, ओर हम लचर व बेबस की तरह देख रहे हये , शाशन प्रशाशन  हमारे दुखों को समझने की जगह हमे  इस समस्या से छुटकारा दिलाने के नाम पर अरबो का खेल खेल जहा हाय ,अब हमें जागना होगा अपने लिए नहीं तो अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए

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